"संस्कार"(कविता)

 लड़कियों को सिखाया जा रहा था संस्कार

अपने कुछ Private कपड़े यूँ

धूप में ना सुखाया करो

उन पर कुछ हल्के कपड़े डाल दिया करो


तुम्हे तमीज सिखाई नहीं गई है क्या

ये तो था लड़कियों के लिए संस्कार

लड़की को अकेला देख

उन पर क्यों झपटा मारते हो


इन्हे किसी ने नहीं बताया

ये नहीं है इनका संस्कार

लड़की को कहा जाता गलत करी तो


तू जिंदा दफना दी जाएगी

क्यों नहीं कहा गया

लडको को भी मौत के घाट उतार दिया जाएगा

कहा गया बराबर वाला संस्कार

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